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सैलरी कैलकुलेटर (CTC से इन-हैंड)

PF, प्रोफ़ेशनल टैक्स और इनकम टैक्स के बाद CTC से मासिक इन-हैंड सैलरी।

₹

%

आमतौर पर 40–50%। नए लेबर कोड में बेसिक + DA वेतन का कम से कम आधा होना चाहिए।

₹

महाराष्ट्र: ₹2,500 सालाना (₹25,000 महीने तक कमाने वाली महिलाओं पर नहीं)। आपके राज्य में न हो तो 0 डालें।

टैक्स व्यवस्था

हर महीने इन-हैंड सैलरी

—

ग्रॉस सैलरी (सालाना)
—
आपकी PF कटौती
—
प्रोफ़ेशनल टैक्स
—
इनकम टैक्स (4% सेस सहित)
—
इन-हैंड (सालाना)
—

हर व्यवस्था में इनकम टैक्स (सालाना)

नई व्यवस्था
—
पुरानी व्यवस्था
—

आपकी CTC का बँटवारा (सालाना)
बेसिक सैलरी
—
भत्ते (HRA, स्पेशल…)
—
नियोक्ता का PF (CTC का हिस्सा)
—
ग्रेच्युटी (CTC का हिस्सा)
—
टैक्स-योग्य आय
—

CTC बनाम इन-हैंड सैलरी

आपकी CTC (कॉस्ट टू कंपनी) वह सब है जो नियोक्ता साल भर में आप पर ख़र्च करता है, जिसमें उसका अपना PF योगदान और कभी-कभी ग्रेच्युटी भी शामिल होती है। इन-हैंड सैलरी वह रकम है जो हर महीने आपके बैंक खाते में आती है, इनके बाद:

  • नियोक्ता का PF और ग्रेच्युटी, जो CTC का हिस्सा हैं पर हर महीने नहीं मिलते;
  • आपका PF योगदान (आमतौर पर बेसिक का 12%);
  • प्रोफ़ेशनल टैक्स (महाराष्ट्र में सालाना ₹2,500);
  • इनकम टैक्स (TDS), जो साल भर की सैलरी में बँटकर कटता है।

FY 2026-27 के उदाहरण

मान लें बेसिक सैलरी CTC का 50%, PF ₹3,000 महीने तक, प्रोफ़ेशनल टैक्स ₹2,500 और कोई अन्य छूट नहीं:

सालाना CTC टैक्स, नई व्यवस्था टैक्स, पुरानी व्यवस्था हर महीने इन-हैंड (नई व्यवस्था)
₹3,00,000 ₹0 ₹0 ₹21,792
₹6,00,000 ₹0 ₹0 ₹43,792
₹10,00,000 ₹0 ₹91,104 ₹77,125
₹13,00,000 ₹0 ₹1,71,756 ₹1,02,125
₹15,00,000 ₹91,884 ₹2,34,156 ₹1,11,135
₹25,00,000 ₹3,09,140 ₹5,46,156 ₹1,76,363

नई व्यवस्था में लगभग ₹12.75 लाख तक की ग्रॉस सैलरी टैक्स-फ़्री है: ₹75,000 की स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद टैक्स-योग्य आय ₹12 लाख रह जाती है, जहाँ रिबेट से टैक्स शून्य हो जाता है।

FY 2026-27 के इनकम टैक्स स्लैब

बजट 2026 में नौकरीपेशा लोगों के लिए दरें नहीं बदलीं।

नई व्यवस्था (डिफ़ॉल्ट) दर पुरानी व्यवस्था (60 साल से कम) दर
₹4 लाख तक शून्य ₹2.5 लाख तक शून्य
₹4–8 लाख 5% ₹2.5–5 लाख 5%
₹8–12 लाख 10% ₹5–10 लाख 20%
₹12–16 लाख 15% ₹10 लाख से ऊपर 30%
₹16–20 लाख 20%
₹20–24 लाख 25%
₹24 लाख से ऊपर 30%
  • स्टैंडर्ड डिडक्शन: ₹75,000 (नई) या ₹50,000 (पुरानी)।
  • रिबेट: ₹12 लाख तक की टैक्स-योग्य आय पर टैक्स शून्य (नई, उसके ठीक ऊपर मार्जिनल रिलीफ़ के साथ) या ₹5 लाख तक (पुरानी)।
  • सेस: टैक्स पर 4%; ₹50 लाख से ऊपर सरचार्ज लगता है।

नई व्यवस्था या पुरानी?

पुरानी व्यवस्था तभी फ़ायदेमंद है जब आपकी छूट बड़ी हों: PF, PPF, ELSS, जीवन बीमा जैसे निवेश (आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 123 में ₹1.5 लाख तक; पहले धारा 80C), किराए पर HRA छूट, हेल्थ इंश्योरेंस और होम लोन का ब्याज। तुलना के लिए इन्हें ऊपर "पुरानी व्यवस्था" में डालें; लगभग ₹15–20 लाख तक कमाने वाले ज़्यादातर लोगों को नई व्यवस्था में ज़्यादा बचता है।

सुझाव

  • PF बचत है, नुक़सान नहीं। इस पर ब्याज मिलता है और यह आपको वापस मिलता है, पर इससे हर महीने की इन-हैंड सैलरी कम होती है।
  • साल की शुरुआत में HR को अपनी व्यवस्था बताएँ, ताकि हर महीने सही TDS कटे।
  • ऑफ़र लेटर अलग-अलग होते हैं। कुछ कंपनियाँ CTC में वेरिएबल पे, बीमा या मील कार्ड भी जोड़ती हैं; ऑफ़र की तुलना से पहले जो हर महीने नहीं मिलता उसे घटा दें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

₹10 लाख CTC पर कितनी इन-हैंड सैलरी मिलेगी?

बेसिक 50%, PF ₹3,000 महीना और ₹2,500 प्रोफ़ेशनल टैक्स मानकर, नई व्यवस्था में लगभग ₹77,125 महीना, और इनकम टैक्स शून्य।

क्या ₹12 लाख तक की सैलरी टैक्स-फ़्री है?

नई व्यवस्था में हाँ: रिबेट के कारण ₹12 लाख तक की टैक्स-योग्य आय पर टैक्स शून्य है, और ₹75,000 की स्टैंडर्ड डिडक्शन के साथ इसका मतलब ₹12.75 लाख तक की ग्रॉस सैलरी है।

PF से मेरी इन-हैंड सैलरी क्यों बदलती है?

आपका PF और नियोक्ता का PF दोनों CTC से निकलते हैं। 17 सितंबर 2026 से EPF की नई वेतन सीमा ₹25,000 महीना है, यानी न्यूनतम PF ₹25,000 तक के बेसिक का 12%, यानी ₹3,000 महीना; कई नियोक्ता पूरे बेसिक का 12% काटते हैं।

क्या सभी राज्यों में प्रोफ़ेशनल टैक्स लगता है?

नहीं। महाराष्ट्र, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, गुजरात और कई अन्य राज्यों में लगता है; कुछ राज्यों में नहीं। अपने राज्य की रकम डालें, या 0।

क्या मेरी डाली हुई जानकारी कहीं सेव होती है?

नहीं। पूरा हिसाब आपके ब्राउज़र में ही होता है। आपकी डाली हुई कोई भी जानकारी हमारे सर्वर पर नहीं भेजी जाती और न ही सेव की जाती है।

स्रोत: Income Tax Department · अंतिम अपडेट:

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