ग्रेच्युटी क्या है?
ग्रेच्युटी वह एकमुश्त रकम है जो नियोक्ता कई साल की नौकरी के बाद नौकरी छोड़ने, रिटायर होने, या मृत्यु या विकलांगता के कारण सेवा समाप्त होने पर देता है। 21 नवंबर 2025 से यह सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (चार नए लेबर कोड में से एक) के तहत आती है, जिसने ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 की जगह ली है। यह 10 या अधिक कर्मचारियों वाले कारख़ानों, दुकानों और अन्य संस्थानों पर लागू होती है।
ग्रेच्युटी कैसे निकलती है
ग्रेच्युटी = आख़िरी मासिक वेतन × 15 ÷ 26 × सेवा के साल
- 15 ÷ 26: हर साल के लिए 15 दिन का वेतन, महीने को 26 कामकाजी दिन मानकर।
- वेतन: आख़िरी महीने का बेसिक वेतन + महंगाई भत्ता (DA)।
- साल: पूरे साल, और अगर बचा हिस्सा छह महीने से ज़्यादा हो तो एक साल और। यानी 5 साल 7 महीने को 6 साल गिना जाता है, पर 5 साल 6 महीने को 5 साल।
उदाहरण
| आख़िरी बेसिक + DA | सेवा | गिने गए साल | ग्रेच्युटी |
|---|---|---|---|
| ₹30,000 | 5 साल | 5 | ₹86,538 |
| ₹30,000 | 5 साल 7 महीने | 6 | ₹1,03,846 |
| ₹50,000 | 10 साल | 10 | ₹2,88,462 |
| ₹75,000 | 20 साल | 20 | ₹8,65,385 |
| ₹1,00,000 | 25 साल | 25 | ₹14,42,308 |
| ₹1,50,000 | 25 साल | 25 | ₹20,00,000 (सीमा; फ़ॉर्मूले से ₹21,63,462) |
नए लेबर कोड में क्या बदला
- 50% वेतन नियम। भत्ते (जैसे HRA और स्पेशल अलाउंस) कुल वेतन के आधे से ज़्यादा नहीं हो सकते। ज़्यादा हों तो अतिरिक्त हिस्सा वेतन में गिना जाता है। उदाहरण: कुल वेतन ₹1,00,000 और बेसिक + DA ₹30,000 हो तो वेतन ₹50,000 माना जाता है, इसलिए 10 साल की ग्रेच्युटी ₹1,73,077 से बढ़कर ₹2,88,462 हो जाती है। यह नियम लगाने के लिए ऊपर अपना कुल वेतन डालें।
- फ़िक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को पाँच के बजाय एक साल की सेवा के बाद ग्रेच्युटी (अनुपात में) मिलती है।
- ₹20 लाख की सीमा जारी है: क़ानून इससे ज़्यादा देना ज़रूरी नहीं करता, हालाँकि नियोक्ता चाहे तो ज़्यादा दे सकता है।
21 नवंबर 2025 से पहले की सेवा पर नए नियम कैसे लागू होंगे, और फ़िक्स्ड-टर्म कॉन्ट्रैक्ट का बचा हिस्सा कैसे गिना जाएगा, यह आपके नियोक्ता की नीति और अंतिम नियमों पर निर्भर हो सकता है, इसलिए रकम की पुष्टि अपने HR विभाग से करें।
क्या ग्रेच्युटी पर टैक्स लगता है?
- केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारी: पूरी तरह टैक्स-फ़्री।
- अन्य कर्मचारी: पूरे करियर में ₹20 लाख तक टैक्स-फ़्री (आयकर अधिनियम, 2025 की अनुसूची II; पहले 1961 के अधिनियम की धारा 10(10))। इससे ज़्यादा रकम वेतन आय में जुड़ती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
ग्रेच्युटी किसे मिलती है?
10 या अधिक कर्मचारियों वाले संस्थान के उन कर्मचारियों को जिन्होंने 5 साल की लगातार सेवा पूरी की है (फ़िक्स्ड-टर्म कॉन्ट्रैक्ट में 1 साल), या जिनकी सेवा मृत्यु या विकलांगता के कारण समाप्त हुई है; ऐसे मामले में न्यूनतम सेवा की शर्त नहीं है।
मैंने 4 साल 8 महीने काम किया है। क्या ग्रेच्युटी मिलेगी?
नियम 5 साल की लगातार सेवा का है, इसलिए आमतौर पर नहीं। कुछ अदालतों ने पाँच साल के बहुत क़रीब की सेवा को गिना है, और कुछ नियोक्ता ज़्यादा उदार होते हैं, इसलिए अपने HR विभाग से पूछें।
ग्रेच्युटी बेसिक वेतन पर निकलती है या ग्रॉस पर?
वेतन पर: बेसिक + महंगाई भत्ता। नए लेबर कोड में, अगर भत्ते कुल वेतन के आधे से ज़्यादा हैं तो अतिरिक्त हिस्सा भी वेतन में गिना जाता है।
अधिकतम ग्रेच्युटी कितनी है?
क़ानून के अनुसार ₹20 लाख। नियोक्ता ज़्यादा दे सकता है, पर प्राइवेट कर्मचारियों के लिए सिर्फ़ ₹20 लाख तक ही टैक्स-फ़्री है।
क्या मेरी डाली हुई जानकारी कहीं सेव होती है?
नहीं। पूरा हिसाब आपके ब्राउज़र में ही होता है। आपकी डाली हुई कोई भी जानकारी हमारे सर्वर पर नहीं भेजी जाती और न ही सेव की जाती है।